निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिए -
फिर से नहीं आता समय जो एक बार चला गया,
जग में कहो बाधारहित कब कौन काम हुआ भला।
बहती नदी सूखे अगर उस पार में इसके चलूँ,
इस सोच में बैठा पुलिन पर , पार जा सकता भला?
किस रीती से काम, कब करना बनाकर योजना,
मन के लिए आशा प्रबल , दृढ़ जो वही बढ़ जाएगा।
उसको मिलेगा तेज बल अनुकूलता सब और से
कब कर्म योगी, वीर, अनुपम साहसी सुख पायेगा।
यह वीर भोग्या , जो हृदय तल में बनी वसुधा सदा,
करती रही आह्वान है , युग वीर का पूरूतत्व का ।
कठिनाइयों में खोज का पथ, ज्योति पूरित जो करें ,
विजयी वही होता धरणि- सुत वरण कर अमरतत्व का।
वसुंधरा किसका आह्वान करती है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
काव्यांश में, कवि कह रहा है कि जीवन में अनेक बाधाएँ आती हैं, लेकिन उन्हें पराजित करके आगे बढ़ना चाहिए। जो व्यक्ति कठिनाइयों में भी अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए दृढ़ रहता है, वही कर्म योगी और वीर पुरुष होता है। वसुंधरा अर्थात् पृथ्वी भी ऐसे कर्म योगी और वीर पुरुषों का आह्वान करती है।