निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
गाँव के चौराहे पर था एक बूढ़ा बरगद,
जटाएँ लटकाए वह ऋषि-सा मौन खड़ा।
उसकी शीतल छाँव में चौपाल सजती थी,
थके पथिकों की हर थकान मिटती थी।
डाल-डाल पर झूले पड़ते सावन में,
पात-पात में बसते थे पंछियों के घर।
सौ बरस उसने धूप-आँधी हँसकर सही,
पर अपने दुख की बात किसी से न कही।
फिर एक दिन आया सड़क चौड़ी करने का फ़रमान,
चली कुल्हाड़ी, थर-थर काँप उठे उसके प्राण।
गिरा वह, जैसे गिरता है घर का बूढ़ा मुखिया,
सिसक उठा चौराहा, उदास हुई सारी दुनिया।
अब दोपहर भर तपती है काली सड़क,
दौड़ती हैं गाड़ियाँ, पर कोई ठहरता नहीं पल भर।
साँझ ढले लौटते पंछी पूछते हैं रो-रोकर —
“विकास की इस आँधी में कहाँ गया हमारा घर?”
पद्यांश के अनुसार बरगद को क्यों काटा गया?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → सड़क चौड़ी करने के लिए
बरगद सड़क चौड़ी करने के आदेश के कारण काटा गया: “फिर एक दिन आया सड़क चौड़ी करने का फ़रमान, चली कुल्हाड़ी”।
अन्य विकल्प — पेड़ का सूखना, आँधी का डर और चौपाल की नई जगह — पद्यांश में इनका कोई उल्लेख नहीं; बरगद तो सौ बरस से धूप-आँधी सहता आया था।