निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
संगीत का मन से गहरा नाता है। थका हुआ व्यक्ति जब कोई मधुर धुन सुनता है, तो उसके चेहरे पर अनायास ही हल्कापन आ जाता है। माँ की लोरी सुनकर रोता हुआ बच्चा चुप हो जाता है, जबकि वह लोरी के शब्दों का अर्थ नहीं समझता। इससे पता चलता है कि संगीत शब्दों से पहले भावों तक पहुँचता है। खेतों में काम करते किसान, नाव खेते मल्लाह और चक्की पीसती स्त्रियाँ अपने गीतों के सहारे कठिन श्रम को भी सहज बना लेते थे। गीत उनके लिए मनोरंजन भर नहीं था, बल्कि थकान को बाँटने का साधन था।
किंतु संगीत का प्रभाव सुनने वाले की मनःस्थिति पर भी निर्भर करता है। जो राग किसी को शांति देता है, वही किसी दूसरे को उदास कर सकता है। इसलिए संगीत को केवल कानों का विषय मान लेना भूल है; वह सुनने वाले के अनुभवों और स्मृतियों से मिलकर अर्थ पाता है। आजकल लोग चलते-फिरते भी कानों में संगीत लगाए रहते हैं। ऐसे में संगीत अक्सर पृष्ठभूमि का शोर बनकर रह जाता है और मन तक नहीं उतर पाता। संगीत का सच्चा सुख तभी मिलता है, जब उसे एकाग्र होकर सुना जाए। जो व्यक्ति कुछ क्षण रुककर किसी धुन में डूब जाता है, वह भीतर से हल्का और संतुलित अनुभव करता है। संगीत मन को बहलाता ही नहीं, उसे सँवारता भी है।
गद्यांश के आधार पर कौन-सा कथन सही नहीं है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → संगीत केवल मन को बहलाने का साधन है।
प्रश्न सही नहीं कथन पूछता है; गद्यांश का अंतिम वाक्य है: “संगीत मन को बहलाता ही नहीं, उसे सँवारता भी है।”
अतः संगीत को केवल मन बहलाने का साधन कहना गद्यांश के विपरीत है।
अन्य विकल्प — (1), (2) और (4) — तीनों बातें गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद में सीधे कही गई हैं, इसलिए ये सही कथन हैं।