निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्न का उत्तर दीजिए -
फिर से नहीं आता समय जो एक बार चला गया,
जग में कहो बाधारहित कब कौन काम हुआ भला।
बहती नदी सूखे अगर उस पार में इसके चलूँ,
इस सोच में बैठा पुलिन पर , पार जा सकता भला?
किस रीती से काम, कब करना बनाकर योजना,
मन के लिए आशा प्रबल , दृढ़ जो वही बढ़ जाएगा।
उसको मिलेगा तेज बल अनुकूलता सब और से
कब कर्म योगी, वीर, अनुपम साहसी सुख पायेगा।
यह वीर भोग्या , जो हृदय तल में बनी वसुधा सदा,
करती रही आह्वान है , युग वीर का पूरूतत्व का ।
कठिनाइयों में खोज का पथ, ज्योति पूरित जो करें ,
विजयी वही होता धरणि- सुत वरण कर अमरतत्व का।
बहती नदी के उदाहरण से कवि ने क्या सिद्ध करना चाहा?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर समय भी नदी की धारा की तरह बहता चला जाता है है।
काव्यांश में, कवि कह रहा है कि समय एक बार बीत जाने पर फिर वापस नहीं आता। बहती नदी भी एक बार बह जाने के बाद फिर वापस नहीं लौटती। इसलिए, समय का सदुपयोग करना चाहिए और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए।
अन्य विकल्पों की व्याख्या निम्नलिखित है:
- समय फिर लौट कर आ जाता है: यह गलत है। समय एक बार बीत जाने पर फिर वापस नहीं आता।
- समय भी नदी की धारा की तरह लौट आता है: यह भी गलत है। समय एक बार बीत जाने पर फिर वापस नहीं आता।
- समय रुक जाता है: यह भी गलत है। समय हमेशा बहता रहता है।
इस प्रकार, काव्यांश में कवि ने बहती नदी के उदाहरण से यह सिद्ध करना चाहा है कि समय भी नदी की धारा की तरह बहता चला जाता है।