निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर इससे संबंधित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
अंखियाँ हरि-दरसन की भूखी।
कैसे रहें रूप-रस रांची ये बतियां सुनि रूखी॥
अवधि गनत इकटक मग जोवत तब ये तौ नहिं झूखी।
अब इन जोग संदेसनि ऊधो, अति अकुलानी दूखी॥
बारक वह मुख फेरि दिखावहु दुहि पय पिवत पतूखी।
सूर, जोग जनि नाव चलावहु ये सरिता है सूखी॥
'झूखी' से कवि का आशय है-
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → संतप्त होना
“अवधि गनत इकटक मग जोवत तब ये तौ नहिं झूखी” — झूखी का अर्थ है दुखी (संतप्त) हुईं; प्रतीक्षा में आँखें दुखी नहीं थीं, योग-संदेश सुनकर “अति अकुलानी दूखी” हैं।
अन्य विकल्प — बहस करना, आकर्षित होना और अत्यन्त प्रसन्न — 'झूखी' के अर्थ नहीं हैं।