पद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नों के उत्तर दें -
नहीं दान है नहीं दक्षिणा
खाली हाथ चली आई।
पूजा की विधि नहीं जानती
फिर भी नाथ चली आई॥
पूजा और पुजापा प्रभुवर
इसी पुजारिन को समझो।
दान दक्षिणा और निछावर
इसी भिखारिन को समझो॥
मैं उन्मत्त प्रेम की लोभी
हृदय दिखाने आयी हूँ।
जो कुछ है वह यही पास है
इसे चढ़ाने आयी हूँ॥
चरणों पर अर्पित है इसको
चाहो तो स्वीकार करो।
यह तो वस्तु तुम्हारी ही है
ठुकरा दो या प्यार करो॥
लेखिका दान-दक्षिणा के समकक्ष किसे प्रस्तुत कर रही है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → स्वयं को
पद्यांश में है: “दान दक्षिणा और निछावर / इसी भिखारिन को समझो”; 'भिखारिन' कवयित्री स्वयं है।
अन्य विकल्प — श्रद्धा भाव, समर्पण, पुष्प — को पद्यांश में दान-दक्षिणा नहीं कहा गया।