निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए.
आँसुओं का कोष उर, दृग अश्रु की टकसाल;
तरल जल-कण से बने घन-सा क्षणिक मृदुगात!
जीवन विरह का जलजात!
अश्रु से मधुकण लुटाता आ यहाँ मधुमास;
अश्रु ही की हाट बन जाती करुण बरसात!
जीवन विरह का जलजात!
काल इस को दे गया पल-आँसुओं का हार;
पूछता इस की कथा निःश्वास ही में वात
जीवन विरह का जलजात !
जो तुम्हारा हो सके लीला कमल यह आज,
खिल उठे निरुपम तुम्हारी देख स्मित का प्रात!
जीवन विरह का जलजात!
निम्नलिखित पद्यांश में रेखांकित पद में कौन-सा अलंकार है- 'तरल जल-कण से बने घन-सा क्षणिक मृदुगात।'
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → उपमा
घन-सा में 'सा' वाचक शब्द है; कोमल शरीर (मृदुगात) की तुलना बादल (घन) से की गई है, इसलिए उपमा अलंकार है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: अनुप्रास — वर्णों की आवृत्ति; रेखांकित पद में यह नहीं है।
विकल्प 2: यमक — एक शब्द की भिन्न अर्थों में आवृत्ति।
विकल्प 3: रूपक — उपमेय-उपमान का अभेद; यहाँ 'सा' से केवल समानता बताई गई है।