निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
अरुण यह मधुमय देश हमारा!
जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।
सरस तामरस गर्भ विभा पर—नाच रही तरुशिखा मनोहर।
छिटका जीवन हरियाली पर—मंगल कुंकुम सारा!
लघु सुरधनु से पंख पसारे—शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए—समझ नीड़ निज प्यारा।
बरसाती आँखों के बादल—बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकराती अनंत की—पाकर जहाँ किनारा।
हेम कुंभ ले उषा सवेरे—भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मदिर ऊँघते रहते जब—जगकर रजनी भर तारा।
पद्यांश के लिए सबसे उचित शीर्षक है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → मधुमय देश
पूरा पद्यांश अपने देश की सुंदरता और आत्मीयता का गुणगान करता है: “अरुण यह मधुमय देश हमारा!”।
अन्य विकल्प — बरसते बादल, रात के तारे और पक्षियों का नीड़ — ये पद्यांश के केवल एक-एक अंश हैं, पूरे भाव को नहीं समेटते।