निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
घरों, विवाह-समारोहों और भोजनालयों में रोज़ बहुत-सा भोजन बिना खाए फेंक दिया जाता है। हम प्रायः इसे मामूली बात मानकर अनदेखा कर देते हैं, पर थाली में छोड़ा गया हर कौर अपने साथ बहुत कुछ ले जाता है। अनाज उगाने में किसान की मेहनत लगती है, खेतों को पानी चाहिए और उसे हम तक पहुँचाने में ईंधन खर्च होता है। जब भोजन फेंका जाता है तो ये सारे साधन भी व्यर्थ चले जाते हैं। कूड़े के ढेर में सड़ता भोजन दुर्गंध फैलाता है और ऐसी गैसें छोड़ता है जो वातावरण के लिए हानिकारक होती हैं। दूसरी ओर, आज भी बहुत-से लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पाता।
भोजन की बर्बादी रोकने के लिए किसी बड़े आयोजन की नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतों की ज़रूरत है। उतना ही पकाया जाए जितना खाया जा सके, और थाली में उतना ही लिया जाए जितनी भूख हो। बचे हुए भोजन को ठीक ढंग से रखकर अगली बार काम में लाया जा सकता है। समारोहों में दिखावे के लिए अनगिनत व्यंजन बनवाने की होड़ भी इस समस्या को बढ़ाती है। कई जगह लोग मिलकर बचा हुआ साफ़ भोजन ज़रूरतमंदों तक पहुँचाते हैं। यह प्रयास सराहनीय है, पर असली उपाय यही है कि भोजन बचे ही कम। जब हम अन्न को केवल पेट भरने की वस्तु न मानकर किसी के परिश्रम का फल समझेंगे, तभी उसका सम्मान करना सीखेंगे।
गद्यांश के लिए सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है:
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → अन्न की बर्बादी: एक अनदेखी समस्या
पूरा गद्यांश भोजन की बर्बादी, उसके नुकसान और उसे रोकने के उपायों पर है। आरंभ में ही कहा गया है: “हम प्रायः इसे मामूली बात मानकर अनदेखा कर देते हैं”
अन्य विकल्प — (1), (3) और (4) — गद्यांश के केवल किसी छोटे अंश से जुड़े हैं या उसमें आते ही नहीं; ये पूरे गद्यांश का विषय नहीं बताते।