निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्राचीन काल में महाराज जनक विदेह में राज्य करते थे। मिथिला विदेह की राजधानी थी। मिथिला नगरी में राजमहल के आस-पास कोई एक हज़ार सन्यासियों की कुटिया थी। मिथिला के सिंहासन पर बैठने पर भी महाराज जनक को फकीरी का शौक था। कहा जाता है कि महाराज जनक ज्ञानी थे। वे इस तरह राजकाज चलाते थे मानों स्वयं परमात्मा के विनयशील सेवक हैं। सुबह से शाम तक सारे राज्य का प्रबंध करते, शत्रुओं का पता करते, अपराधी को दंड देते, लोककल्याण के उपाय करते और इतना सब कुछ करने पर भी वे किसी सांसारिक कार्य में लिप्त नहीं होते थे। इसीलिए लोग उनको विदेह जनक कहते थे। विदेह का मतलब किसी भी चीज के होने पर भी उसका अभिमान न करना। भारतीय संस्कृति हमें यही सिखाती है। कुछ भी हो जाने पर भी सामान्य बने रहना क्योंकि साधारण होना असाधारण बात है। |
गद्यांश के अनुसार महाराज जनक का परमात्मा से क्या सम्बन्ध था? |
दास का मित्र का सेवक का भाई का |
सेवक का |
सही उत्तर विकल्प (3) है → सेवक का |