निम्नलिखित में से किन लोकोक्तियों के आगे उनका सही अर्थ दिया गया है?
(A) 'दैव-दैव आलसी पुकारा' - आलसी व्यक्ति भाग्य के भरोसे रहता है
(B) 'तेल देखो, तेल की धार देखो' - जल्दबाज़ी में निर्णय लेना
(C) 'थूक से सत्तू नहीं सनता' - थोड़ी सामग्री से बड़ा काम नहीं होता
(D) 'नक्कारखाने में तूती की आवाज़' - बड़े लोगों के बीच छोटे की बात नहीं सुनी जाती
(E) 'दुधारू गाय की लात भी सहनी पड़ती है' - निर्बल पर अत्याचार करना
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → केवल (A), (C) और (D)
(A) दैव-दैव आलसी पुकारा — सही; आलसी व्यक्ति भाग्य के भरोसे रहता है।
(B) तेल देखो, तेल की धार देखो — गलत; सही अर्थ है धैर्य से स्थिति और परिणाम देखना।
(C) थूक से सत्तू नहीं सनता — सही; थोड़ी सामग्री से बड़ा काम नहीं होता।
(D) नक्कारखाने में तूती की आवाज़ — सही; बड़े लोगों के बीच छोटे की बात नहीं सुनी जाती।
(E) दुधारू गाय की लात भी सहनी पड़ती है — गलत; सही अर्थ है जिससे लाभ हो, उसकी कड़वी बातें भी सहनी पड़ती हैं।