निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
कविता सोचती रहती है दर्द से -
कल क्या होगा इस दुनिया का
उद्दंड यंत्रों पर सवार आदमी
रौंद रहा है जीवन-प्रदा प्रकृति को
मिट्टी, आग, हवा, पानी, आकाश
सभी आहत हो चेतावनी दे रहे हैं
लेकिन बाज़ार-सुख में खोया आदमी
सुन नहीं रहा है
उसके द्वारा तोड़े गये मूल्यों के टुकड़े
काँच के टुकड़ों की तरह बिखरे हैं राह में
और सफर को लहूलुहान कर रहे हैं
वे कह रहे हैं -
हमें मत तोड़ो / हम हैं तो तुम हो
लेकिन नहीं सुनता आदमी
लोग उड़े जा रहे हैं
राजनीति, बाजारवाद और धर्मान्धता की शोर भरी आँधी में
कविता की पुकार खो जा रही है
स्वयं को टूटने से बचाने की पुकार कौन कर रहा है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → मूल्य
मूल्यों के टुकड़े “वे कह रहे हैं - हमें मत तोड़ो / हम हैं तो तुम हो”; यह पुकार मूल्यों की है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: बाजार — बाज़ार-सुख में तो आदमी खोया है; बाज़ार पुकार नहीं करता।
विकल्प 2: मनुष्य — मनुष्य तो यह पुकार “सुन नहीं रहा”।
विकल्प 3: कांच — मूल्यों के टुकड़ों की तुलना काँच के टुकड़ों से की गई है।