निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
बर्फ़ की चादर ओढ़े सोई, चुप-चुप ऊँची घाटी है,
सीमा पर मैं जाग रहा हूँ, साथ मेरे यह माटी है।
सन-सन करती शीत हवाएँ, गालों को छू जाती हैं,
माँ के आँचल की गरमी की, याद मुझे दे जाती हैं।
दूर कहीं मेरे गाँव में, सरसों फूल रही होगी,
तुलसी के चौरे पर माँ, दीपक बाल रही होगी।
बाबा खेतों से लौटे होंगे, कंधे पर हल धरकर,
बहना राह निहार रही होगी, चिट्ठी की आस लगाकर।
पर पलकों में नींद नहीं है, मन में कोई डर भी नहीं,
जिस धरती ने जन्म दिया, उससे बढ़कर घर भी नहीं।
चाँद-सा उजला यह हिम-पर्वत, मेरा मंदिर, मेरा धाम,
इसकी रक्षा में मिट जाऊँ, तो भी अमर रहेगा नाम।
‘सन-सन करती शीत हवाएँ’ में कौन-सा अलंकार है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → पुनरुक्ति प्रकाश
एक ही शब्द ‘सन’ की आवृत्ति हुई है, इसलिए पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है: “सन-सन करती शीत हवाएँ”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: उपमा — यहाँ सा, सम, जैसे आदि वाचक शब्द से कोई तुलना नहीं है।
विकल्प 3: रूपक — हवाओं पर किसी दूसरी वस्तु का अभेद आरोप नहीं किया गया।
विकल्प 4: उत्प्रेक्षा — मानो, जनु जैसी कोई संभावना या कल्पना नहीं की गई।