निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
हरि गोकुल की प्रीति चलाई।
सुनहु उपँगसुत मोहिं न बिसरत ब्रजवासी सुखदाई॥
यह चित्त होत जाऊँ मैं अबही, यहाँ नहीं मन लागत।
गोप सुग्वाल गाय बन चारत अपि दुख पायो त्यागत॥
कहँ माखन चोरी? कह जसुमति 'पूत जेंव' करी प्रेम।
सूर श्याम से वचन सहित सुनी व्यापत आपन नेम॥
कह जसुमति 'पूत जेंव' करी प्रेम
रेखांकित शब्दों का अर्थ है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → पुत्र भोजन कर लो
जेंवना का अर्थ है भोजन करना; यशोदा प्रेम से कहती हैं: 'पूत जेंव' — पुत्र, भोजन कर लो।
अन्य विकल्प — पुत्र जाओ, पुत्र गया और पुत्र ज्यादा बोलता है — जेंव का अर्थ नहीं देते।