निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
पूरब से पश्चिम तक फैली,
जिसकी पर्वत-माला है।
यही हिमालय अपनी उत्तर,
सीमा का रखवाला है॥
हिम का मुकुट शीश पर धरता,
आसमान से बातें करता।
सूरज की स्वर्णिम किरणों में,
इसका जगमग रूप निखरता॥
कल-कल बहते निर्झर जल में,
इसने अमृत डाला है।
यही हिमालय अपनी उत्तर,
सीमा का रखवाला है॥
जल में अमृत किसने डाला है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → हिमालय ने
काव्यांश कहता है: “कल-कल बहते निर्झर जल में, इसने अमृत डाला है”; यहाँ 'इसने' हिमालय के लिए आया है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: सूरज ने — सूरज की किरणों में हिमालय का रूप निखरता है।
विकल्प 2: आसमान ने — हिमालय आसमान से बातें करता है।
विकल्प 3: कवि ने — कवि तो हिमालय का वर्णन कर रहा है।