'मानव समाज में अरुण पड़ा, जल जंतु बीच हो वरुण पड़ा।
इस तरह भभकता राणा था, मानो सर्पों में गरुड़ पड़ा।'
इन पंक्तियों में कौन-सा रस निहित है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → वीर रस
इन पंक्तियों में युद्ध में राणा प्रताप के पराक्रम का वर्णन है; स्थायी भाव उत्साह है, इसलिए यहाँ वीर रस है।
“मानो सर्पों में गरुड़ पड़ा” — शत्रुओं के बीच राणा वैसे ही टूट पड़ते हैं जैसे साँपों पर गरुड़।
अन्य विकल्प — हास्य (स्थायी भाव: हास), अद्भुत (विस्मय) और भयानक (भय) — के स्थायी भाव इन पंक्तियों में नहीं हैं।