पद्यांश के आधार पर निम्न प्रश्नों के उत्तर दें -
नहीं दान है नहीं दक्षिणा
खाली हाथ चली आई।
पूजा की विधि नहीं जानती
फिर भी नाथ चली आई॥
पूजा और पुजापा प्रभुवर
इसी पुजारिन को समझो।
दान दक्षिणा और निछावर
इसी भिखारिन को समझो॥
मैं उन्मत्त प्रेम की लोभी
हृदय दिखाने आयी हूँ।
जो कुछ है वह यही पास है
इसे चढ़ाने आयी हूँ॥
चरणों पर अर्पित है इसको
चाहो तो स्वीकार करो।
यह तो वस्तु तुम्हारी ही है
ठुकरा दो या प्यार करो॥
लेखिका अपने सर्वस्व का स्वामी किसे मानती है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → प्रभु को
कवयित्री प्रभु ('नाथ', 'प्रभुवर') से कहती है: “यह तो वस्तु तुम्हारी ही है / ठुकरा दो या प्यार करो”।
अन्य विकल्प — स्वयं, मंदिर, अज्ञात — को कवयित्री अपने सर्वस्व का स्वामी नहीं कहती।