निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर अगले पांच प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
हैं जन्म लेते जगह में एक ही।
एक ही पौधा उन्हें है पालता।।
रात में उन पर चमकता चाँद भी।
एक ही सी चाँदनी है डालता।।
मेह उन पर है बरसता एक सा।
एक सी उन पर हवाएँ हैं बहीं।।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें।
ढंग उनके एक से होते नहीं।।
छेदकर काँटा किसी की उँगलियाँ।
फाड़ देता है किसी का वर-वसन।।
प्यार में डूबी तितलियों का पर कतर।
भौंरे का है बेध देता श्याम तन।।
फूल लेकर तितलियों को गोद में।
भौंरों को अपना अनूठा रस पिला।।
निज सुगंधों और निराले रंग से।
है सदा देता कली को भी खिला।।
है खटकता एक सब की आँख में।
दूसरा है सोहता सुर-शीश पर।।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे।
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।।
देवताओं के शीश पर कौन सुशोभित होता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → फूल
कवि कहता है: “है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सुर-शीश पर”; यहाँ 'दूसरा' फूल है और 'सुर-शीश' का अर्थ है देवताओं का सिर।
अन्य विकल्प — भक्त, हवा और चाँद — के देवताओं के शीश पर सोहने की बात पद्यांश में नहीं है।