निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
असफलता का नाम सुनते ही अधिकतर लोगों के मन में निराशा और शर्म का भाव जाग उठता है। हम बचपन से यह मानकर चलते हैं कि सफल होना ही योग्यता का प्रमाण है और पीछे रह जाना कमज़ोरी की निशानी। इसी डर से बहुत-से लोग नया काम शुरू करने से पहले ही हार मान लेते हैं। वे सोचते हैं कि यदि प्रयास ही नहीं करेंगे तो असफल होने का खतरा भी नहीं रहेगा। पर यह सुरक्षा असल में एक बंद कमरे जैसी है, जिसमें चोट तो नहीं लगती, पर आगे बढ़ने का रास्ता भी नहीं मिलता।
सच यह है कि असफलता हमें वह सिखा सकती है जो सफलता शायद कभी न सिखाए। जब कोई योजना काम नहीं करती, तब हम रुककर सोचते हैं कि कहाँ चूक हुई। यही आत्म-परीक्षण अगले प्रयास को पहले से बेहतर बनाता है। साइकिल चलाना सीखने वाला बच्चा कई बार गिरता है, पर हर बार संतुलन के बारे में कुछ नया समझ लेता है। हाँ, असफलता से सीखने के लिए ज़रूरी है कि हम उसका दोष केवल परिस्थितियों या दूसरों पर न डालें। जो व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार करने का साहस रखता है, वही उसे सुधार भी पाता है। इसलिए असफलता को अंत नहीं, एक पड़ाव मानना चाहिए, जहाँ से रास्ता फिर से तय किया जा सके।
गद्यांश में साइकिल चलाना सीखने वाले बच्चे का उदाहरण किस बात को स्पष्ट करता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → हर असफल प्रयास से कुछ नया सीखा जा सकता है
गद्यांश में लिखा है: “साइकिल चलाना सीखने वाला बच्चा कई बार गिरता है, पर हर बार संतुलन के बारे में कुछ नया समझ लेता है।”
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: बार-बार गिरने से बच्चे का साहस घट जाता है — गद्यांश के अनुसार गिरकर बच्चा सीखता है, उसका साहस घटने की बात नहीं है।
विकल्प 3: संतुलन बनाना केवल बच्चों के लिए कठिन होता है — उदाहरण कठिनाई की तुलना के लिए नहीं दिया गया।
विकल्प 4: गिरने का दोष परिस्थितियों पर डालना चाहिए — गद्यांश दोष केवल परिस्थितियों पर डालने से मना करता है।