'दूसरे के दुःख को वही समझ सकता है जिसने स्वयं दुःख भोगा हो' — इस भाव के लिए उपयुक्त लोकोक्ति चुनिए -
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → जाके पाँव न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई
जाके पाँव न फटी बिवाई, सो क्या जाने पीर पराई का अर्थ है जिसने स्वयं दुःख न भोगा हो, वह दूसरे का दुःख नहीं समझ सकता।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: घर का भेदी लंका ढाए — घर का भेद जानने वाला ही विनाश कराता है।
विकल्प 2: दूर के ढोल सुहावने — दूर की वस्तु अच्छी लगती है।
विकल्प 3: होनहार बिरवान के होत चीकने पात — महान व्यक्ति के लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं।