निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
ईंट-ईंट पर नाम लिखा है, जिनके खारे पसीने का,
उनको ही अधिकार नहीं है, इस नगरी में जीने का।
ऊँचे-ऊँचे भवन खड़े हैं, बादल से बतियाते हैं,
नींव जिन्होंने रखी उन्हीं को, दरवाज़े ठुकराते हैं।
सुबह-सवेरे सिर पर गारा, धूप में तपती काया है,
काँच-महल के हर कोने में, इनके श्रम की छाया है।
साँझ ढले फुटपाथों पर ही, फटी दरी बिछ जाती है,
चूल्हे की धुँधली लौ में फिर, आधी रोटी पक जाती है।
बच्चे पूछें — “बापू, अपना घर कब हम बनवाएँगे?”
बापू हँसकर कह देता है — “अगले बरस बसाएँगे।”
यह नगरी जगमग-जगमग है, पर उनका जीवन अँधियारा,
जिनके हाथों ने गढ़ डाला, शहर का हर कोना सारा।
पद्यांश के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
(A) शहर के ऊँचे भवन मज़दूरों के पसीने से बने हैं।
(B) मज़दूरों को अपने बनाए भवनों में रहने का अवसर मिलता है।
(C) मज़दूर दिन भर धूप में कठिन श्रम करते हैं।
(D) मज़दूरों के बच्चे अपने घर का सपना देखते हैं।
(E) मज़दूरों के यहाँ भरपेट भोजन बनता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें :
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → केवल (A), (C) और (D)
(A) शहर के ऊँचे भवन मज़दूरों के पसीने से बने हैं — सही; “ईंट-ईंट पर नाम लिखा है, जिनके खारे पसीने का”।
(B) मज़दूरों को अपने बनाए भवनों में रहने का अवसर मिलता है — गलत; “नींव जिन्होंने रखी उन्हीं को, दरवाज़े ठुकराते हैं”।
(C) मज़दूर दिन भर धूप में कठिन श्रम करते हैं — सही; “सुबह-सवेरे सिर पर गारा, धूप में तपती काया है”।
(D) मज़दूरों के बच्चे अपने घर का सपना देखते हैं — सही; “बापू, अपना घर कब हम बनवाएँगे?”।
(E) मज़दूरों के यहाँ भरपेट भोजन बनता है — गलत; उनके चूल्हे पर “आधी रोटी पक जाती है”।