निम्नलिखित पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसपर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
क्या देखा है तुमने नर को नर के आगे हाथ पसारे?
क्या देखे हैं तुमने उसकी आँखों में खारे फव्वारे?
जगपति कहाँ? अरे सदियों से वह तो हुआ राख की ढेरी;
वरना समता-संस्थापन में लग जाती क्या इतनी देरी?
छोड़ आसरा अलख शक्ति का रे नर, स्वयं जगत्पति तू है,
तू यदि जूठे पत्ते चाटे, तो मुझ पर लानत है, थू है!
कैसा बना रूप यह तेरा, घृणित, पतित, बीभत्स, भयंकर!
नहीं याद क्या तुझको, तू है चिर सुन्दर, नवीन प्रलयंकर?
भिक्षा पात्र फेंक हाथों से, तेरे स्नायु बड़े बलशाली,
अभी उठेगा प्रलय नींद से, तनिक बजा तू अपनी ताली।
कवि मनुष्य को क्या प्रेरणा दे रहा है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → कर्म की प्रेरणा
कवि कहता है: “छोड़ आसरा अलख शक्ति का रे नर, स्वयं जगत्पति तू है” और “भिक्षा पात्र फेंक हाथों से, तेरे स्नायु बड़े बलशाली”; अर्थात् सहारा छोड़कर अपने बल से कर्म करो।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: भक्ति की प्रेरणा — कवि अलख शक्ति का आसरा छोड़ने को कहता है।
विकल्प 2: आस्तिक बनने की प्रेरणा — कवि ईश्वर पर निर्भर रहने के विरुद्ध है।
विकल्प 3: नास्तिक बनने की प्रेरणा — मूल संदेश ईश्वर को नकारना नहीं, स्वयं कर्म करना है।