निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सम्बंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिये -
कविता सोचती रहती है दर्द से -
कल क्या होगा इस दुनिया का
उद्दंड यंत्रों पर सवार आदमी
रौंद रहा है जीवन-प्रदा प्रकृति को
मिट्टी, आग, हवा, पानी, आकाश
सभी आहत हो चेतावनी दे रहे हैं
लेकिन बाज़ार-सुख में खोया आदमी
सुन नहीं रहा है
उसके द्वारा तोड़े गये मूल्यों के टुकड़े
काँच के टुकड़ों की तरह बिखरे हैं राह में
और सफर को लहूलुहान कर रहे हैं
वे कह रहे हैं -
हमें मत तोड़ो / हम हैं तो तुम हो
लेकिन नहीं सुनता आदमी
लोग उड़े जा रहे हैं
राजनीति, बाजारवाद और धर्मान्धता की शोर भरी आँधी में
कविता की पुकार खो जा रही है
इस पद्यांश में प्रकृति को किस रूप में याद किया गया है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → जीवन दायिनी
पद्यांश कहता है: “रौंद रहा है जीवन-प्रदा प्रकृति को”; जीवन-प्रदा = जीवन देने वाली, अर्थात् जीवनदायिनी।
अन्य विकल्प — शक्ति स्वरूपा, चेतना और पदार्थ — पद्यांश में प्रकृति के लिए ये रूप नहीं आए हैं।