निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर दीजिए।
मुझे यह कहने में हिचक नहीं कि मैं और चीजों की तरह कला को भी उपयोगिता की तुला पर तौलता हूँ। निस्संदेह कला का उद्देश्य सौंदर्य-सृष्टि की पुष्टि करना है और वह हमारे आध्यात्मिक आनंद की कुंजी है, पर ऐसा कोई रुचिगत मानसिक तथा आध्यात्मिक आनंद नहीं, जो अपनी उपयोगिता का पहलू न रखता हो। आनंद स्वतः एक उपयोगिता - युक्त वस्तु है और उपयोगिता की दृष्टि से एक ही वस्तु से हमें सुख भी होता है, और दुःख भी। आसमान पर छाई लालिमा निस्संदेह बड़ा सुंदर दृश्य है; परंतु आषाढ़ में अगर आकाश पर वैसी लालिमा छा जाए, तो वह हमें प्रसन्नता देने वाली नहीं हो सकती। उस समय तो हम आसमान पर काली-काली घटाएँ देखकर ही आनंदित होते हैं। फूलों को देखकर हमें इसलिए आनंद होता है कि उनसे फलों की आशा होती है, प्रकृति से अपने जीवन का सुर मिलाकर रहने में हमें इसीलिए आध्यात्मिक सुख मिलता है कि उससे हमारा जीवन विकसित और पुष्ट होता है। प्रकृति का विधान वृद्धि और विकास है, और जिन भावों, अनुभूतियों और विचारों से हमें आनंद मिलता है, वे इसी वृद्धि और विकास के सहायक हैं। कलाकार अपनी कला से सौंदर्य की सृष्टि करके परिस्थिति को विकास के उपयोगी बनाता है।
परंतु सौंदर्य भी और पदार्थों की तरह स्वरूपस्थ और निरपेक्ष नहीं, उसकी स्थिति भी सापेक्ष है। एक रईस के लिए जो वस्तु सुख का साधन है, वही दूसरे के लिए दुःख का कारण हो सकती है। एक रईस अपने सुरभित सुरम्य उद्यान में बैठकर जब चिड़ियों का कल-गान सुनता है, तो उसे स्वर्गीय सुख की प्राप्ति होती है; परंतु एक दूसरा सज्ञान मनुष्य वैभव की इस सामग्री को घृणित वस्तु समझता है।
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक बताएँ:-
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → कला की उपयोगिता
पूरा गद्यांश कला को उपयोगिता की तुला पर तौलने की बात करता है: आनंद और सौंदर्य भी उपयोगिता से जुड़े हैं; इसलिए 'कला की उपयोगिता' उपयुक्त शीर्षक है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: आनंद का अर्थ — आनंद की चर्चा कला की उपयोगिता को समझाने के लिए एक अंश भर है।
विकल्प 3: सौंदर्य की सृष्टि — यह कला का एक पक्ष है, गद्यांश का मुख्य विषय नहीं।
विकल्प 4: जीवन का सुर — यह केवल एक वाक्य में आया है।