दिए गए पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए-
लरिकाई को प्रेम, कहो अलि, कैसे करिके छूटत?
कहा कहीं ब्रजनाथ चरित अब अंतरगति यों लूटत।।
चंचल चाल मनोहर चितवनि, वह मुसुकानि मंद धुन गावत।
नटवर भेस नंदनंदन को वह विनोद गृह वन तें आवत।।
चरनकमल की सपथ करति हों यह संदेस मोहि विष सम लागत।
सूरदास मोहि निमिष न बिसरत मूरति सोवत जागत।।
उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ क्या है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → ऊधौ - गोपियों का संवाद
गोपियाँ ऊधौ को “कहो अलि” कहकर संबोधित करती हैं और उनके लाए संदेस को विष-समान बताती हैं; अतः यह ऊधौ-गोपी संवाद है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: कृष्ण - गोपियों का संवाद — कृष्ण उपस्थित नहीं हैं; गोपियाँ उन्हें याद कर रही हैं।
विकल्प 2: राधा - कृष्ण संवाद — पद में राधा और कृष्ण की बातचीत नहीं है।
विकल्प 4: मीरा - कृष्ण संवाद — पद सूरदास का है।