सही उत्तर विकल्प (1) है → करुण
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करुण रस: जहाँ किसी प्रिय व्यक्ति के चिर-वियोग, मृत्यु या भारी अनिष्ट के कारण हृदय में 'शोक' नामक स्थायी भाव जाग्रत होता है, वहाँ करुण रस होता है।
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इन पंक्तियों में किसी प्रियजन (जीवितेश/पति) की मृत्यु या अचेत अवस्था पर विलाप किया जा रहा है। यहाँ पत्नी अपने मृत या अचेत पति को जगाने का प्रयास करते हुए अत्यंत दुखी मन से कह रही है कि "हे प्राणनाथ! उठो, यह कैसी गहरी नींद (मृत्यु की नींद) है? यह कठोर भूमि आपके सोने योग्य नहीं है।"
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यहाँ 'शोक' का भाव पूरी तरह मुखरित हो रहा है, इसलिए इसमें करुण रस है।
Other Options:
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श्रृंगार रस: इसमें नायक-नायिका के प्रेम, मिलन या विरह (प्रेमपूर्ण) का वर्णन होता है। यहाँ प्रेम नहीं, बल्कि गहरा शोक है।
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वीर रस: इसमें युद्ध, दान या दया के लिए 'उत्साह' का भाव होता है।
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शांत रस: इसमें वैराग्य, मोक्ष या संसार से विरक्ति ('निर्वेद') का भाव होता है।
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