निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए:-
"सच हम नहीं ,सच तुम नहीं
सच है महज संघर्ष ही
संघर्ष से हट कर जिए तो क्या जिए हम या की तुम|
जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झर कर कुसुम|
जो लक्ष्य भूल रुका नहीं|
जो हार देख झुका नहीं|
जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही|
सच हम नहीं,सच तुम नहीं|
ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे|
जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे|
जो भी परिस्थितियाँ मिलें
काँटे चुभें, कलियाँ खिलें|
हारे नहीं इनसान, संदेश जीवन का यही|"
"सच हम नहीं ,सच तुम नहीं
सच है महज संघर्ष ही
संघर्ष से हट कर जिए तो क्या जिए हम या की तुम|
जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झर कर कुसुम|
जो लक्ष्य भूल रुका नहीं|
जो हार देख झुका नहीं|
जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही|
सच हम नहीं,सच तुम नहीं|
ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे|
जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे|
जो भी परिस्थितियाँ मिलें
काँटे चुभें, कलियाँ खिलें|
हारे नहीं इनसान, संदेश जीवन का यही|"
'जो नत हुआ वह मृत हुआ' किसके समान है?
Answer & explanation
Correct answer: option 2
'जो नत हुआ वह मृत हुआ' पुष्प के समान है|