निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
भारत माता ग्रामवासिनी।
खेतों में फैला है श्यामल,
धूल-भरा मैला-सा आँचल।
गंगा-यमुना में आंसू जल,
मिट्टी की प्रतिमा उदासिनी।
दैन्य-जड़ित अपलक नत-चितवन,
अधरों में चिर-नीरव रोदन।
युग-युग के तम से विषाक्त मन,
वह अपने घर में प्रवासिनी।
तीस कोटि संतान नग्न-तन,
अर्ध-क्षुधित, शोषित, निरवस्त्र जन।
मूढ़, असभ्य, अशिक्षित, निर्धन,
नत-मस्तक तरु-तलनिवासिनी।
स्वर्ण-शस्य पद-पद-तल-लुंठित,
धरती-सा सहिष्णुमन कुंठित।
क्रंदन-कंपित अधर मौन-स्मित,
राहु-ग्रसित शरदेंदु-हासनी।
पद्यांश में 'भारत माता' के किस रूप का वर्णन किया गया है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → दैन्य रूप का
“दैन्य-जड़ित अपलक नत-चितवन”, “मिट्टी की प्रतिमा उदासिनी” जैसी पंक्तियाँ भारत माता की दीनता और उदासी दिखाती हैं।
अन्य विकल्प — अमृत, विकसित और वैभवशाली रूप — पद्यांश के भूखे, अशिक्षित और निर्धन भारत के चित्र से मेल नहीं खाते।