निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
भारत माता ग्रामवासिनी।
खेतों में फैला है श्यामल,
धूल-भरा मैला-सा आँचल।
गंगा-यमुना में आंसू जल,
मिट्टी की प्रतिमा उदासिनी।
दैन्य-जड़ित अपलक नत - चितवन,
अधरों में चिर- नीरव रोदन।
युग-युग के तम से विषाक्त मन,
वह अपने घर में प्रवासिनी।
तीस कोटि संतान नग्न-तन,
अर्ध-क्षुधित, शोषित, निरवस्त्र जन।
मूढ़, असभ्य, अशिक्षित, निर्धन,
नतमस्तक तरु-तलनिवासिनी।
स्वर्ण-शस्य पद-पद-तल - लुंठित,
धरती-सा सहिष्णुमन कुंठित।
क्रंदन- कंपित अधर मौन- स्मित,
राहु-ग्रसित शरदेंदु-हासनी।
गद्यांश में 'भारत माता' के किस रूप का वर्णन किया गया है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → दैन्य रूप का
सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित इन पंक्तियों में भारत माता के वैभवशाली या विकसित रूप के बजाय उनकी दीनता (दैन्य) और दुख का चित्रण किया गया है।
पद्यांश के आधार पर विश्लेषण:
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दैन्य और उदासी: कविता में "मिट्टी की प्रतिमा उदासिनी" और "दैन्य-जड़ित अपलक नत-चितवन" जैसे शब्दों का प्रयोग हुआ है, जो उनकी गरीबी और लाचारी को दर्शाते हैं।
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शोषित अवस्था: "अर्ध-क्षुधित, शोषित, निरवस्त्र जन" पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि उस समय की भारतीय जनता भूखी और शोषित थी।
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पराधीनता का दुख: "वह अपने घर में प्रवासिनी" और "राहु-ग्रसित शरदेंदु-हासनी" के माध्यम से कवि ने यह बताया है कि भारत माता अपने ही देश में गुलाम (प्रवासिनी) की तरह हैं और उनका सुख राहु रूपी गुलामी से ग्रसित है।