प्रस्तुत कविता के आधार पर पूछे प्रश्न के उत्तर के रूप में सभी विकल्प का चयन कीजिए:
आये महन्त वसन्त
मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला,
बैठे किंशुक छत्र लगा बाँध पाग पीला,
चँवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनन्त।
आये महन्त वसन्त।
श्रद्धानत तरुओं की अंजलि से झरे पात,
कोंपल के मुँदे नयन थर-थर-थर पुलक गात,
अगरु-धूम लिए झूम रहे सुमन दिग-दिगन्त।
आये महन्त वसन्त।
खड़-खड़ करताल बजा नाच रही विसुध हवा,
डाल-डाल अलि-पिक के गायन का बँधा समाँ,
तरु-तरु की ध्वजा उठी जय-जय का है न अन्त।
आये महन्त वसन्त।
इस कविता में किसका चित्रण हुआ है:
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → प्रकृति का
कविता में टीला, किंशुक, सरसों, तरु, कोंपल, सुमन, हवा, अलि-पिक — प्रकृति (वसंत की शोभा) का चित्रण है।
अन्य विकल्प — मानव सभ्यता, स्त्री और पशु — कविता का विषय नहीं हैं।