प्रस्तुत कविता के आधार पर पूछे प्रश्न के उत्तर के रूप में सभी विकल्प का चयन कीजिए:
आये महन्त वसन्त
मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला,
बैठे किंशुक छत्र लगा बाँध पाग पीला,
चँवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनन्त।
आये महन्त वसन्त।
श्रद्धानत तरुओं की अंजलि से झरे पात,
कोंपल के मुँदे नयन थर-थर-थर पुलक गात,
अगरु-धूम लिए झूम रहे सुमन दिग-दिगन्त।
आये महन्त वसन्त।
खड़-खड़ करताल बजा नाच रही विसुध हवा,
डाल-डाल अलि-पिक के गायन का बँधा समाँ,
तरु-तरु की ध्वजा उठी जय-जय का है न अन्त।
आये महन्त वसन्त।
कवि किस ऋतु का उत्सव मना रहा है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → वसंत ऋतु
कविता की टेक है “आये महन्त वसन्त”; पूरी कविता वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1 और 2: वर्षा ऋतु, शीत ऋतु — कविता में इनका उल्लेख नहीं है।
विकल्प 3: महंत ऋतु — 'महंत' कोई ऋतु नहीं; कवि ने वसंत को महंत कहा है।