निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
अस्ताचल रवि, जल छल-छल छवि,
स्तब्ध विश्वकवि, जीवन उन्मन।
मन्द पवन बहती सुधि रह रह,
परिमल की कह कथा पुरातन।
दूर नदी पर नौका सुन्दर,
दिखी मृदु टार बहती ज्यों स्वर।
वहां स्नेह की प्रतनु देह की,
बिना गेह की बैठी नूतन।
ऊपर शोभित मेघ सत्र सित,
नीचे अमित नील जल दोलित।
ध्यान नयन, मन चिन्त्य-प्राण-धन,
किया शेष रवि ने कर अर्पण।
इस कविता में आए वाक्य 'दूर नदी पर नौका सुन्दर' में कौन सा अलंकार है ?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
सही उत्तर विकल्प (4) है → अनुप्रास अलंकार
“दूर नदी पर नौका सुन्दर” में 'न', 'द' और 'र' वर्णों की बार-बार आवृत्ति है, इसलिए यह अनुप्रास अलंकार है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: यमक अलंकार — कोई शब्द अलग अर्थों में दोहराया नहीं गया।
विकल्प 2: रूपक अलंकार — उपमेय पर उपमान का आरोप नहीं है।
विकल्प 3: श्लेष अलंकार — किसी शब्द के एक साथ कई अर्थ नहीं हैं।