निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित अगले पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
गाँव के चौराहे पर था एक बूढ़ा बरगद,
जटाएँ लटकाए वह ऋषि-सा मौन खड़ा।
उसकी शीतल छाँव में चौपाल सजती थी,
थके पथिकों की हर थकान मिटती थी।
डाल-डाल पर झूले पड़ते सावन में,
पात-पात में बसते थे पंछियों के घर।
सौ बरस उसने धूप-आँधी हँसकर सही,
पर अपने दुख की बात किसी से न कही।
फिर एक दिन आया सड़क चौड़ी करने का फ़रमान,
चली कुल्हाड़ी, थर-थर काँप उठे उसके प्राण।
गिरा वह, जैसे गिरता है घर का बूढ़ा मुखिया,
सिसक उठा चौराहा, उदास हुई सारी दुनिया।
अब दोपहर भर तपती है काली सड़क,
दौड़ती हैं गाड़ियाँ, पर कोई ठहरता नहीं पल भर।
साँझ ढले लौटते पंछी पूछते हैं रो-रोकर —
“विकास की इस आँधी में कहाँ गया हमारा घर?”
‘जटाएँ लटकाए वह ऋषि-सा मौन खड़ा’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → उपमा
बरगद की तुलना ऋषि से वाचक शब्द ‘सा’ द्वारा की गई है, अतः उपमा अलंकार है: “जटाएँ लटकाए वह ऋषि-सा मौन खड़ा”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: रूपक — रूपक में उपमेय और उपमान को एक मान लिया जाता है; यहाँ ‘सा’ से तुलना है।
विकल्प 2: यमक — इसमें एक शब्द भिन्न अर्थों में दोहराया जाता है; यहाँ ऐसा नहीं।
विकल्प 4: श्लेष — इसमें एक शब्द के एक साथ अनेक अर्थ होते हैं; यहाँ ऐसा कोई शब्द नहीं।