नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: 'विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः' — यह रस-सूत्र भरत मुनि के 'नाट्यशास्त्र' में मिलता है।
कथन II: मन में थोड़ी देर के लिए उठकर स्थायी भाव को पुष्ट करने वाले और फिर लुप्त हो जाने वाले भाव 'अनुभाव' कहलाते हैं।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → कथन I सही है, किन्तु कथन II गलत है
कथन I — सही; यह रस-सूत्र भरत मुनि ने नाट्यशास्त्र में दिया है।
कथन II — गलत; यह परिभाषा संचारी (व्यभिचारी) भाव की है; भावों को प्रकट करने वाली शारीरिक चेष्टाएँ अनुभाव कहलाती हैं।