निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
जयंतियाँ ऐसी ही होती हैं। हम प्रेमचंद के लिए कुछ नहीं कर सकते। वे अपने और सबके लिए खुद ही कर गए। वे पढ़े जाते हैं और उनके लिखे पर विचार होता है। अगर वे पढ़े जाने वाले कथा-लेखक न होते और विचारणीय न होते, तो हजारों जयंती समारोहों से भी उनका कुछ नहीं सधता। उनकी जीवनी उनके पुत्र ने लिख ही दी है। विश्वविद्यालयों में उन पर शोध लगातार हो रहा है। बाहर के लोग अगर प्रेमचंद पर ज्यादा सोच-विचार करने लगें तो शोध करके प्रोफेसर होने वाले के पेट पर लात लगेगी। प्रेमचंद के साहित्य को पढ़कर तो भारत सरकार किसानों की हालत सुधार नहीं देगी। जमीनें बेदखल होंगी ही। कुत्ते-बिल्ली के नाम से ज़मीन कराई ही जाएगी।
प्रेमचन्द का साहित्य पढ़कर भारत सरकार किसानों के बारे में क्या निर्णय लेगी?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → हालत सुधार नहीं देगी
गद्यांश कहता है: “प्रेमचंद के साहित्य को पढ़कर तो भारत सरकार किसानों की हालत सुधार नहीं देगी।”
अन्य विकल्प — हालत सुधारना, कानून बनाना और कड़े कदम उठाना — गद्यांश के व्यंग्य के विपरीत हैं।