उपरोक्त पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए।
निर्गुन कौन देस को बासी?
मधुकर! हँसि समुझाय, सौंह दे बूझति साँच, न हाँसी।।
को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि, को दासी?
कैसो बरन, भेस है कैसा केहि रस के अभिलासी।।
पावेगो पुनि कियो आपनो जो रे! कहेगो गाँसी।।
सुनत मौन है रह्यो ठग्यो सो सूर सबे मति नासी।।
उपरोक्त पद्यांश के रचयिता हैं -
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → सूरदास
अंतिम पंक्ति “सूर सबे मति नासी” में कवि की छाप है; यह पद सूरदास के भ्रमरगीत का है।
अन्य विकल्प — मीरा, कबीर और तुलसी — इनकी छाप पद में नहीं है।