निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुन कर लिखिए ---
पथ भूल न जाना पथिक कहीं | पथ में कांटे तो होंगे ही दूर्बादल सरिता सर होंगे | सुंदर गिरी वन वापी होंगे सुन्दरता की मृगतृष्णा में पथ भूल न जाना पथिक कहीं || जब कठिन कर्म पगडंडी पर राही का मन उन्मुख होगा |जब सपने सब मिट जाएँगे | कर्तव्य मार्ग सन्मुख होगा | तब अपनी प्रथम विफलता में पथ भूल न जाना पथिक कहीं |
कर्म पगडंडी किसे कहते हैं ?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
काव्यांश में, कवि राही को संबोधित करते हुए कह रहा है कि जीवन में कठिन कर्म पगडंडी पर चलना पड़ता है। इसमें अनेक बाधाएँ आती हैं, जैसे कि कांटे, दूर्बादल, सरिता सर, सुंदर गिरी, वन और वापी आदि। इन बाधाओं से विचलित न होकर, अपने मार्ग पर दृढ़ता से चलना चाहिए। जब कठिन कर्म पगडंडी पर राही का मन उन्मुख होगा, तब सपने सब मिट जाएँगे और कर्तव्य मार्ग सन्मुख होगा। तब अपनी प्रथम विफलता में भी पथ से विचलित नहीं होना चाहिए।
इस प्रकार, कर्म पगडंडी से तात्पर्य जीवन की कठोर साधना से है।
अन्य विकल्पों की व्याख्या निम्नलिखित है:
- जीवन की उलझनों को: कर्म पगडंडी जीवन की उलझनों को नहीं दर्शाती है, बल्कि जीवन की कठोर साधना को दर्शाती है।
- जीवन की मुश्किलों को: कर्म पगडंडी जीवन की मुश्किलों को भी नहीं दर्शाती है, बल्कि जीवन की कठोर साधना को दर्शाती है।
- जीवन की सुविधाओं को: कर्म पगडंडी जीवन की सुविधाओं को नहीं दर्शाती है, बल्कि जीवन की कठोर साधना को दर्शाती है।