निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये।
वह तोड़ती पत्थर;
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर -
वह तोड़ती पत्थर।
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
श्याम तन, भर बंधा यौवन
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत-मन,
गुरू हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार,
सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।
कवि कविता के माध्यम से क्या संदेश देना चाहता है?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → जीवन से निराश हुए बिना अपने कर्म को करना
कड़ी धूप में बिना छाया के भी वह स्त्री “प्रिय-कर्म-रत-मन” होकर “करती बार-बार प्रहार” — अर्थात् कवि जीवन से निराश हुए बिना अपना कर्म करने का संदेश देता है।
अन्य विकल्प — अत्यन्त क्रोधित रहना, विषम परिस्थिति से घबराना, दुख का कारण दूसरों को मानना — कविता के भाव के विपरीत हैं।