'चरण कमल बंदौं हरिराई' में कौन सा अलंकार है? |
श्लेष रूपक उपमा यमक |
रूपक |
चरण-कमल बन्दौं हरिराई में रूपक अलंकार है। इस काव्य अंश में प्रभु के चरणों को कमल के समान सुंदर और मनोहर बताया गया है। प्रभु के चरणों पर उपमान कमल को आरोपित किया गया है। विभिन्नता न होने से उपमेय ने उपमान का रूप ले लिया है। दूसरे शब्दों में यह कह सकते है कि कवि यह कहना चाहते है कि प्रभु के चरण कमल का ध्यान करे जो अत्यंत सुखदाई है। यहाँ कमल और चरण में कोई भेद नहीं है इसलिए रुपक अलंकार है। |