निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुन कर लिखिए |
पथ भूल न जाना पथिक कहीं | पथ में कांटे तो होंगे ही दूर्बादल सरिता सर होंगे | सुंदर गिरी वन वापी होंगे सुन्दरता की मृगतृष्णा में पथ भूल न जाना पथिक कहीं || जब कठिन कर्म पगडंडी पर राही का मन उन्मुख होगा |जब सपने सब मिट जाएँगे | कर्तव्य मार्ग सन्मुख होगा | तब अपनी प्रथम विफलता में पथ भूल न जाना पथिक कहीं |
प्रथम विफलता का भाव क्या है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर पहले-पहल काम न बनना है।
काव्यांश में प्रथम विफलता के भाव को व्यक्त करते हुए कहा गया है कि जब कठिन कर्म पगडंडी पर राही का मन उन्मुख होगा, जब सपने सब मिट जाएँगे, कर्तव्य मार्ग सन्मुख होगा, तब अपनी प्रथम विफलता में पथ भूल न जाना पथिक कहीं।
इससे स्पष्ट है कि प्रथम विफलता का भाव है कि जब कोई व्यक्ति किसी कठिन कार्य को करने का प्रयास करता है, तो उसे सफलता प्राप्त करने से पहले कई बार असफलता का सामना करना पड़ता है। इन असफलताओं से मनुष्य को डरना नहीं चाहिए, बल्कि उनसे सीखना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।