निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये।
वह तोड़ती पत्थर;
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर -
वह तोड़ती पत्थर।
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
श्याम तन, भर बंधा यौवन
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत-मन,
गुरू हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार,
सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।
प्रस्तुत कविता के कवि हैं:
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
'वह तोड़ती पत्थर' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता है।