निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये।
वह तोड़ती पत्थर;
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर -
वह तोड़ती पत्थर।
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
श्याम तन, भर बंधा यौवन
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत-मन,
गुरू हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार,
सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।
प्रस्तुत कविता के कवि हैं:
Answer & explanation
Correct answer: option 2
प्रस्तुत पद्यांश कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित "वह तोड़ती पत्थर" कविता का प्रथम छंद है। इस छंद में कवि ने इलाहाबाद के एक चौराहे पर पत्थर तोड़ती एक श्याम तन वाली युवती का चित्रण किया है। कवि ने युवती के श्रमशील और कर्मठ स्वभाव का वर्णन किया है। वह युवती बिना किसी छायादार पेड़ के नीचे बैठकर पत्थर तोड़ रही है। उसका तन श्याम है और उसका यौवन भरपूर है। वह अपने प्रिय कर्म में रत है और एक मजबूत हथौड़े से बार-बार पत्थरों पर प्रहार कर रही है।
इस प्रकार, प्रस्तुत पद्यांश के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हैं।
अन्य विकल्पों की व्याख्या:
- सुमित्रानंदन पंत छायावाद के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति, प्रेम, सौंदर्य आदि विषयों का चित्रण किया गया है। प्रस्तुत पद्यांश में इन विषयों का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए यह कवि सुमित्रानंदन पंत की रचना नहीं हो सकती है।
- जयशंकर प्रसाद छायावाद के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति, प्रेम, इतिहास आदि विषयों का चित्रण किया गया है। प्रस्तुत पद्यांश में इन विषयों का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए यह कवि जयशंकर प्रसाद की रचना नहीं हो सकती है।
- रामनरेश त्रिपाठी एक प्रसिद्ध गद्यकार थे। उन्होंने कई उपन्यास, कहानी संग्रह और नाटक लिखे। उनकी कोई कविता प्रसिद्ध नहीं है। इसलिए यह कवि रामनरेश त्रिपाठी की रचना नहीं हो सकती है।