निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर प्रश्न का उत्तर दीजिए:- |
संस्कृत के प्राचीन कवियों को प्रकृति वर्णन क्यों ग्राह्य है? |
क्योंकि उन्हें प्रकृति के संश्लिष्ट वर्णन मिलते है प्रकृति के विविध रूपों के वर्णन मिलते हैं संस्कृत भाषा के प्रांजल रूप के दर्शन होते है प्रकृति के वर्णन उद्धिपन रूप में प्राप्त होतें है |
प्रकृति के विविध रूपों के वर्णन मिलते हैं |
गद्यांश के अनुसार, संस्कृत के प्राचीन कवियों को प्रकृति वर्णन इसलिए ग्राह्य है क्योंकि वे प्रकृति के विविध रूपों के वर्णन करते हैं। गद्यांश में कहा गया है कि प्रकृति अनंत रूपों में हमारे सामने आती है। कहीं वह मधुर, सुसज्जित या सुंदर रूप में होती है, तो कहीं रूखे, बेडौल या कर्कश रूप में। कहीं वह भव्य, विशाल या विचित्र रूप में होती है, तो कहीं उग्र, कुशल या भयंकर रूप में। वाल्मीकि, कालिदास जैसे संस्कृत के प्राचीन कवियों ने प्रकृति के इन सभी रूपों का वर्णन किया है। उन्होंने प्रकृति की सुंदरता, शांति, शक्ति, भयंकरता, आदि सभी पहलुओं को अपनी कविताओं में उकेरा है। इसलिए, संस्कृत के प्राचीन कवियों को प्रकृति वर्णन इसलिए ग्राह्य है क्योंकि वे प्रकृति के विविध रूपों का वर्णन करते हैं। इसलिए, सही उत्तर प्रकृति के विविध रूपों के वर्णन मिलते हैं है। |