प्रस्तुत पद्यांश के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूँथा जाऊँ
चाह नहीं, प्रेमी माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, हे हरि, डाला जाऊँ
चाह नहीं देवों के सिर पर, चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पर जावें वीर अनेक।
प्रस्तुत कविता में किसकी आत्माभिव्यक्ति है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → पुष्प की
कविता में पुष्प स्वयं अपनी चाह कहता है: “मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: मनुष्य की — बोलने वाला 'मैं' फूल है, जो बनमाली से कहता है।
विकल्प 2: देवताओं की — देवों के सिर पर चढ़ने की चाह को फूल अस्वीकार करता है।
विकल्प 4: प्रेमियों की — प्रेमी-माला में बिंधना भी फूल नहीं चाहता।