जाती हुई धूप संध्या की
सेंक रही है मां
अपना अप्रासंगिक होना
देख रही है मां
भरा हुआ घर है
नाती-पोतों से, बच्चों से
अनबोला बहुओं का बोले
बंद खिड़कियों से
इधर-उधर उड़ती सी नज़रें
फेंक रही है मां
फूली सरसों नहीं रही
अब खेतों में मन के
पिता नहीं हैं, अब नस-नस
क्या कंगन सी खनकें
रस्ता धकी हुई यादों का
छेंक रही है मां
माँ क्या देख रही है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
कविता में, माँ अपना अप्रासंगिक होना देख रही है
माँ को लगता है कि वह अपने परिवार में अब कोई मायने नहीं रखती है। उसका परिवार अब बड़ा हो गया है, और वह अपने बच्चों और पति के लिए पहले जैसी महत्वपूर्ण नहीं है।