निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिये।
वह तोड़ती पत्थर;
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर -
वह तोड़ती पत्थर।
कोई न छायादार
पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;
श्याम तन, भर बंधा यौवन
नत नयन, प्रिय-कर्म-रत-मन,
गुरू हथौड़ा हाथ,
करती बार-बार प्रहार,
सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।
इलाहाबाद के पथ पर कवि ने किसको देखा है?
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → पत्थर तोड़ने वाली स्त्री को
कवि ने इलाहाबाद के पथ पर पत्थर तोड़ती स्त्री को देखा है: “वह तोड़ती पत्थर”, “श्याम तन, भर बंधा यौवन”।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: पत्थर तोड़ने वाले वृद्ध पुरुष को — 'तोड़ती' स्त्रीलिंग है और “भर बंधा यौवन” युवावस्था बताता है।
विकल्प 2: पत्थर तोड़ने वाली बच्ची को — “भर बंधा यौवन” से वह युवती है, बच्ची नहीं।
विकल्प 4: पत्थर तोड़ने वाले पुरुष को — 'तोड़ती', 'बैठी हुई', 'करती' स्त्रीलिंग क्रियाएँ हैं।