निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-
ऐसे क्षण अन्धकार घन में जैसे विद्युत
जागी पृथ्वी-तनया-कुमारिका-छबि अच्युत
देखते हुए निष्पलक, याद आया उपवन
विदेह का, - प्रथम स्नेह का लतान्तराल मिलन
नयनों का - नयनों से गोपन- प्रिय सम्भाषण, -
पलकों का नव पलकों पर प्रथमोत्थान-पतन, -
काँपते हुए किसलय, झरते पराग-सुमदय, -
गाते खग-नव-जीवन-परिचय-तरु-मलय-वलय,-
ज्योति: प्रपात स्वर्गीय, -ज्ञात छबि प्रथम स्वीय,-
जानकी-नयन-कमनीय प्रथम कम्पन तुरीय।
'ऐसे क्षण अन्धकार घन में जैसे विद्युत
जागी पृथ्वी तनया कुमारिका छबि अच्युत।'
उपरोक्त पंक्तियों का अर्थ होगा -
Answer & explanation
Correct answer: option 3
सही उत्तर विकल्प (3) है → अन्धकार के क्षणों में जैसे बिजली चमकी और पृथ्वी-पुत्री की छवि याद आ गयी।
“ऐसे क्षण अन्धकार घन में जैसे विद्युत / जागी पृथ्वी-तनया-कुमारिका-छबि अच्युत” — घने अंधकार के क्षण में जैसे बिजली चमकती है, वैसे ही पृथ्वी-पुत्री (सीता) की छवि याद आ गई।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: अन्धकार में दिया जलाया गया। — पंक्ति में दीया नहीं, विद्युत (बिजली) है।
विकल्प 2: अन्धकार में पृथ्वी की छवि बहुत सुन्दर लगी। — 'पृथ्वी-तनया' का अर्थ पृथ्वी नहीं, पृथ्वी की पुत्री (सीता) है।
विकल्प 4: अन्धकार में पृथ्वी गर्जना करने लगी। — पंक्ति में गर्जना का कोई उल्लेख नहीं है।