प्रस्तुत गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए: संघर्ष के मार्ग में अकेले ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छा शक्ति और लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने तथा जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्त्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय हैं- प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है। प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक ने अध्ययन छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था- तुम्हे जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं से संघर्ष करने का अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें। सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथो और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए, दृढ़ संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्ष रूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओं रूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए। |
ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का क्या निष्कर्ष है? |
संघर्ष से डरना स्वाभाविक है। संघर्ष से विमुख होकर विशेष हानि नहीं है। निडर रहना आवश्यक है। संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना मानव धर्म के प्रतिकूल है। |
संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना मानव धर्म के प्रतिकूल है। |
सही उत्तर विकल्प (4) है → संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना मानव धर्म के प्रतिकूल है। |