निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्न का सही विकल्प का चयन कीजिए।
ऋतु वसंत का सुप्रभात था
मंद मंद था अनिल बह रहा
बालारुण की मृदु किरणें थीं
अगल-बगल स्वर्णिम शिखर थे
एक-दूसरे से विरहित हो
अलग-अलग रहकर ही
जिनको सारी रात बितानी होती,
निशा काल से चिर अभिशापित
बेबस उस चकवा-चकई का
बंद हुआ क्रंदन, फिर उनमें
उस महान सरवर के तीरे
शैवालों की हरी दरी पर
प्रणय-कलह छिड़ते देखा है।
बादल को घिरते देखा है।
इस ऋतु में कैसा वातावरण था?
Answer & explanation
Correct answer: option 1
सही उत्तर विकल्प (1) है → धीमी-धीमी हवा चल रही थी
पद्यांश में कहा गया है: “मंद मंद था अनिल बह रहा”; अनिल = हवा।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 2: काले-पीले बादल छाये हुए थे — पद्यांश के इस अंश में बादलों के छाने का वर्णन नहीं।
विकल्प 3: सूर्य की किरणें गर्मी पैदा कर रही थीं — किरणें 'मृदु' (कोमल) थीं।
विकल्प 4: दिन के अवसान का समय था — समय 'सुप्रभात' का था, दिन के अंत का नहीं।