प्रस्तुत पद्यांश से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखें -
मण थें परस हरि रे चरण॥ टेक॥
सुभग सीतल कंवल कोमल, जगत ज्वाला हरण।
इण चरण प्रह्लाद परस्यां इन्द्र पदवी धरण।
इण चरण ध्रुव अटल करस्यां, सरण असरण सरण।
इण चरण ब्रह्मण्ड भेट्याँ, नखसिखां गिरि भरण।
इण चरण कालियां णाथ्यां गोपी लीला करण।
इण चरण गोबरधन धार्यां गरब मधवा हरण।
दासि मीरां लाल गिरधर, अगम तारण तरण॥
'जगत ज्वाला हरण' पंक्ति का अर्थ है -
Answer & explanation
Correct answer: option 2
सही उत्तर विकल्प (2) है → जिसने जगत के कष्टों को हर लिया हो
“सुभग सीतल कंवल कोमल, जगत ज्वाला हरण” — हरि के चरण संसार की ज्वाला (दुःख, कष्ट) को हर लेने वाले हैं।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
विकल्प 1: जिसने जगत को जला दिया हो — 'हरण' का अर्थ हर लेना है, जलाना नहीं।
विकल्प 3: जगत को हरने वाला — चरण जगत को नहीं, उसकी ज्वाला को हरते हैं।
विकल्प 4: जगत को डुबाने वाला — पद में ऐसा अर्थ नहीं है।