निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढकर प्रश्न का उत्तर दीजिए:-
हे कृष्ण! जरा सुनिए,
सच है की झूठ का मन में गुनिए
धूलों में था मैं पड़ा हुआ,
किसका स्नेह पा बड़ा हुआ,
किसने मुझको सम्मान दिया?
नृपता दे महिमावान किया| जानते सत्य यह सूर्य-रोम ,
तन,मन,धन दुर्योधन का है|
यह जीवन दुर्योधन का है|
सुरपुर से भी मुख मोडूँगा,
केशव! मैं उसे न छोडूंगा |
मित्रता बड़ा अनमोल रत्न
कब इसे तौल सकता है धन?
धरती की तो है क्या बिसात?
आ गए अगर बैकुंठ हाथ,
उसको भी न्योंछावर कर दूँ
कुरुपती के चरणों में रख दूँ|
कर्ण ने मित्रता की तुलना किससे की है?
Answer & explanation
Correct answer: option 4
पद्यांश की पंक्तियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि कर्ण मित्रता को एक अनमोल वस्तु मानता है। वह दुर्योधन के साथ अपनी मित्रता को अपने जीवन से भी अधिक महत्व देता है। वह मानता है कि मित्रता धन से भी अधिक मूल्यवान है।
इसलिए, कर्ण ने मित्रता की तुलना अनमोल रत्न से की है।